Category: Poetry

Poetry

चलता जा रहा हूँ… ना जाने कहाँ…

A Realization

चलता जा रहा हूँ… ना जाने कहाँ… क्या अपनी तलाश है मुझे, या किसी का इंतज़ार। नहीं जानता, कहाँ है मेरी मंज़िल, कहाँ है मेरा संसार। चलता चला आया हूँ मैं ये किस गगन में, कोई भी अपना दिखे ना, मुझे अब इस आँगन में। थक गया हूँ। थोड़ा आराम कर लूँ। पर ये आसान …

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एक ख़्वाब…

a dream

नहीं जानती थी क्या और कौन थे तुम! पर जाना तुम्हे और कुछ कुछ प्यार को! जगा दिए तुमने वो जज़्बात, वो प्यार, जो दबा था मेरे दिल में कहीं! नहीं चाहती थी जिन जज़्बातों को मैं सरहद पे लाना, उन जज़्बातों का शहर बसा दिया तुमने… उन रातों में ना जानें कितनी बात करली …